दिल्ली की सड़कों से उठी एक आवाज़।

यह किसी मसीहा की कहानी नहीं है। यह उन नागरिकों की कहानी है जिन्होंने सिस्टम को बार-बार फेल होते देखा और खुद कुछ करने की ठानी।

निर्दलीय चुनाव का सफर

शेख अरसलान उल्लाह चिश्ती 2025 के दिल्ली चुनाव में एक आम नेता बनकर नहीं, बल्कि सिस्टम से परेशान एक नागरिक बनकर उतरे। 'चिमटा' चुनाव चिन्ह एक आम घर की मेहनत और संघर्ष का प्रतीक बन गया।

Delhi street at night with political posters

ज़मीनी काम

पार्टी बनने से पहले काम शुरू हो चुका था। स्ट्रीटलाइटें ठीक करवाना, मोहल्लों की सफाई, जवाब मांगना। जब लगा कि कोई और नहीं करेगा, तब यह मुहीम शुरू हुई।

Grassroots citizens fixing street

"नागरिक पार्टी क्यों बनी?"

नागरिक पार्टी क्यों बनी?

हमें समझ आया कि बिना पावर के सिर्फ आवाज़ उठाने से काम नहीं चलता। सिस्टम को ठीक करने के लिए सिस्टम का हिस्सा बनना पड़ता है।

हमारा विज़न

हम जवाबदेही का एक नया ढांचा बना रहे हैं। एक ऐसी पार्टी जहां लोकल वार्ड कैप्टन असली नेता हैं, और जहां हर टैक्स देने वाले को पता हो कि उसका पैसा कहां लग रहा है।

फेल सिस्टम के बीच एक नया सिस्टम बनाने की कोशिश।

यह मुहीम उन सबके लिए है जो रोज़ के संघर्ष से थक चुके हैं। अब काम दिखना चाहिए।